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शेयर खरीदते ही गिर जाता है और बेचते ही बढ़ जाता है – आखिर ऐसा क्यों होता है?
- March 5, 2025
- Posted by: Subhash Sahni
- Category: Stock Market Psychology

क्या आपने भी महसूस किया है?
रवि एक उत्साही निवेशक था। वह महीनों से स्टॉक मार्केट की दुनिया को समझने की कोशिश कर रहा था। एक दिन उसने रिसर्च की, चार्ट्स देखे, एक्सपर्ट्स की सलाह ली और एक बेहतरीन स्टॉक खरीदने का फैसला किया।
लेकिन जैसे ही उसने खरीदारी की, शेयर की कीमत गिरने लगी।
रवि घबरा गया, लेकिन खुद को समझाया कि थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
फिर कुछ दिन बाद, स्टॉक की कीमत और नीचे चली गई। निराश होकर उसने नुकसान में ही शेयर बेच दिए। और जैसे ही उसने शेयर बेचे, कीमत फिर से बढ़ने लगी।
रवि गुस्से से बोला, “क्या मार्केट मुझे तंग करने के लिए ही चलती है?”
क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है?
अगर हां, तो चलिए इस रहस्य से पर्दा उठाते हैं और समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है!
1. मनोवैज्ञानिक प्रभाव – Fear & Greed का खेल
शेयर बाजार में दो शक्तिशाली भावनाएँ काम करती हैं – डर (Fear) और लालच (Greed)।
- जब बाजार तेजी में होता है, तो निवेशक लालची हो जाते हैं और शेयर खरीदने के लिए दौड़ पड़ते हैं। लेकिन तब तक बड़े निवेशक पहले ही खरीदारी कर चुके होते हैं। जब आम लोग खरीदते हैं, तो वे आमतौर पर ऊँची कीमत पर खरीदते हैं, जिसके बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू हो जाती है और स्टॉक गिरने लगता है।
- जब बाजार गिरता है, तो डर का माहौल बनता है। आम निवेशक घबरा कर अपने शेयर बेच देते हैं, जबकि बड़े खिलाड़ी इसी समय खरीदारी करते हैं।
यही कारण है कि जब आप खरीदते हैं, तो स्टॉक गिर जाता है और जब आप बेचते हैं, तो वह बढ़ जाता है।
2. इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स बनाम रिटेल इन्वेस्टर्स
बाजार में दो तरह के खिलाड़ी होते हैं –
- बड़े निवेशक (Institutional Investors): जैसे म्यूचुअल फंड्स, FIIs, DIIs, बैंक और बड़े व्यापारी। इनके पास करोड़ों रुपये का फंड होता है और ये रणनीतिक रूप से खरीदारी और बिकवाली करते हैं।
- छोटे निवेशक (Retail Investors): आम लोग, जिनके पास सीमित फंड होता है। ये अक्सर भावनाओं में बहकर फैसले लेते हैं।
बड़े निवेशक पहले खरीदारी करते हैं और जब रिटेल इन्वेस्टर्स लालच में आकर खरीदते हैं, तो बड़े निवेशक उन्हें महंगे दाम पर बेच देते हैं। जब बाजार गिरता है, तो आम लोग घबराकर बेचते हैं और यही समय होता है जब बड़े निवेशक कम कीमत पर खरीदारी करते हैं।
इसलिए शेयर खरीदने के बाद गिर जाता है और बेचने के बाद बढ़ जाता है।
3. मार्केट का सिंपल लॉजिक – डिमांड और सप्लाई
स्टॉक मार्केट भी एक बाजार की तरह काम करता है। जब किसी स्टॉक की मांग (Demand) ज्यादा होती है, तो उसकी कीमत बढ़ती है। जब उसकी आपूर्ति (Supply) ज्यादा होती है, तो कीमत गिरती है।
- जब ज्यादा लोग किसी स्टॉक को खरीदते हैं, तो उसकी डिमांड बढ़ती है और शेयर की कीमत ऊपर जाती है।
- जब ज्यादा लोग उसे बेचने लगते हैं, तो आपूर्ति बढ़ जाती है और शेयर की कीमत नीचे गिरती है।
अब सोचिए, जब आप खरीदने जाते हैं, तो अक्सर वो स्टॉक पहले ही महंगा हो चुका होता है, क्योंकि उसमें पहले से ही डिमांड थी। लेकिन जैसे ही आपने खरीदा, डिमांड घटने लगी और बड़े निवेशकों ने बेचना शुरू कर दिया। इसी वजह से स्टॉक गिरने लगता है।
4. न्यूज और मीडिया का प्रभाव
रवि की तरह कई लोग न्यूज़ चैनलों, सोशल मीडिया और वॉट्सएप ग्रुप्स से स्टॉक टिप्स लेते हैं।
- जब कोई स्टॉक चर्चा में आता है, तो आम निवेशक उसे खरीदने लगते हैं। लेकिन ध्यान दीजिए, बड़ी मछलियाँ पहले ही उसे खरीद चुकी होती हैं। वे खुद मीडिया में खबरें फैलाते हैं और जब आम लोग खरीदते हैं, तो वे धीरे-धीरे अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं।
- जब कोई स्टॉक बुरी खबरों में आता है, तो आम निवेशक डर कर बेचने लगते हैं। यही वह समय होता है जब स्मार्ट निवेशक सस्ते में खरीदारी कर लेते हैं।
इसीलिए जब आप खरीदते हैं, तो वह गिरने लगता है और जब आप बेचते हैं, तो वह चढ़ने लगता है।
5. टेक्निकल और फंडामेंटल फैक्टर्स
– टेक्निकल एनालिसिस
मार्केट में कई तकनीकी संकेतक (Technical Indicators) होते हैं, जैसे –
- RSI (Relative Strength Index): जब RSI बहुत ज्यादा होता है (70+), तो स्टॉक ओवरबॉट (Overbought) होता है और गिर सकता है। जब RSI बहुत कम (30-) होता है, तो स्टॉक ओवरसोल्ड (Oversold) होता है और बढ़ सकता है।
- Moving Averages: जब कोई स्टॉक अपने 200 DMA से ऊपर होता है, तो बड़े खिलाड़ी मुनाफा बुक करने लगते हैं। जब नीचे आता है, तो वे फिर से खरीदारी शुरू करते हैं।
– फंडामेंटल फैक्टर्स
अगर किसी कंपनी के फंडामेंटल्स कमजोर होते हैं, तो लंबे समय में स्टॉक गिरेगा ही। अगर कंपनी के रिजल्ट अच्छे हैं और बिज़नेस बढ़ रहा है, तो गिरावट के बाद स्टॉक फिर से बढ़ेगा।
6. स्टॉप लॉस हिट होना
अगर आपने स्टॉप लॉस लगाया और बाजार थोड़ा गिरा, तो आपका स्टॉप लॉस हिट हो जाएगा और आपके शेयर बिक जाएंगे। लेकिन हो सकता है कि उसके बाद स्टॉक ऊपर चला जाए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बड़े निवेशक स्टॉप लॉस को ट्रिगर करके सस्ते में खरीदारी करना चाहते हैं।
7. FOMO और FOLO का असर
- FOMO (Fear of Missing Out): जब कोई स्टॉक तेजी से बढ़ता है, तो हमें लगता है कि कहीं हम मौके से चूक न जाएँ और हम खरीद लेते हैं। लेकिन हो सकता है कि यह पहले ही ऊँचाई पर हो और गिरना शुरू कर दे।
- FOLO (Fear of Losing Out): जब स्टॉक गिरता है, तो हम डरकर उसे बेच देते हैं। लेकिन हो सकता है कि उसके बाद वह फिर से चढ़ जाए।
समाधान – सही रणनीति अपनाएँ!
अब सवाल यह है कि इस समस्या से कैसे बचें?
- भावनाओं पर काबू रखें – डर और लालच में आकर फैसले न लें।
- रिसर्च करें – स्टॉक खरीदने से पहले उसका फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस करें।
- बड़ी गिरावट में खरीदें, बड़ी तेजी में बेचें – दूसरों के उलट सोचें, तभी मुनाफा होगा।
- स्टॉप लॉस और टारगेट सेट करें – लॉन्ग टर्म सोचें और सस्ते में खरीदने की रणनीति अपनाएँ।
- भीड़ का हिस्सा न बनें – जब सब खरीद रहे हों, तो बेचने पर ध्यान दें और जब सब बेच रहे हों, तो खरीदने पर।
निष्कर्ष
रवि को अब समझ में आ गया था कि स्टॉक मार्केट में भावनाओं से खेलना नहीं चाहिए। उसने सीखा कि सही समय पर खरीदना और बेचना ही असली कला है।
याद रखें, मार्केट आपको परेशान नहीं करता, यह आपको सीखने का मौका देता है!
तो अगली बार सोच-समझकर निवेश करें और मार्केट को मात दें!